चंडीगढ़ | सुप्रीम कोर्ट में पेंशन को लेकर एक अहम मामला सामने आया है, जिसमें अदालत ने स्पष्ट किया है कि पेंशन किसी प्रकार की दया या बख्शीश नहीं, बल्कि कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है। यह मामला एक रिटायर्ड कर्मचारी द्वारा दायर याचिका के जरिए कोर्ट तक पहुंचा, जिसमें आरोप लगाया गया कि उसे वर्षों से पेंशन के लिए भटकना पड़ रहा है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि प्रशासनिक देरी, स्पष्ट नीति की कमी और सरकारी उदासीनता के कारण उसे समय पर पेंशन नहीं मिल सकी। पहले संबंधित इलाहाबाद हाई कोर्ट से भी उसे कोई ठोस राहत नहीं मिली, जिसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पेंशन कर्मचारी की जीवनभर की सेवा का प्रतिफल है और इसे रोकना या देने में अनावश्यक देरी करना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान पर शराब के नशे में होने के आरोपों ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। आम आदमी पार्टी की पूर्व सांसद और अब भाजपा नेता स्वाति मालीवाल ने इस मुद्दे पर बेहद तीखा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री के तत्काल 'अल्कोहल टेस्ट' की मांग की है। मालीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक विवादित पोस्ट साझा करते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मान कई महत्वपूर्ण मौकों पर नशे की हालत में रहे हैं, यहाँ तक कि उन्होंने पूर्व में विदेश यात्रा के दौरान प्लेन से उतारे जाने वाली कथित घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने मुख्यमंत्री के आचरण को 'बेशर्मी' करार देते हुए कहा कि जो व्यक्ति संवेदनशील सीमावर्ती राज्य की फाइलें नशे की हालत में साइन करता हो, उसे पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने केंद्र और राज्यपाल से मांग की है कि जांच में दोषी पाए जाने पर मुख्यमंत्री को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए।

विधानसभा सत्र पर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन: एल्कोमीटर लाने की उठी मांग
मजदूर दिवस के अवसर पर बुलाए गए विशेष सत्र को लेकर कांग्रेस की पंजाब इकाई ने चंडीगढ़ की सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सत्र केवल एक 'राजनीतिक नाटक' है और सरकार को इसके बजाय मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। सदन के भीतर विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने मोर्चा संभालते हुए मांग की कि विधानसभा के सभी दरवाजे बंद कर हर विधायक का एल्कोमीटर टेस्ट कराया जाए। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह सदन की गरिमा को बनाए रख सकें। विपक्ष ने स्पष्ट किया कि जब तक मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य और स्थिति की निष्पक्ष जांच नहीं होती, वे सरकार की नीतियों का विरोध जारी रखेंगे। इस पूरे विवाद ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़वाहट को और बढ़ा दिया है।