60% वोट बैंक के गणित पर प्रशांत किशोर का दांव, उपचुनाव क्यों बना पहली पसंद?
पटना। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए एक खास सियासी बिसात बिछाई है। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव से दूर रहने के बाद अब प्रशांत किशोर का बांकीपुर सीट पर ध्यान केंद्रित करना उनके गहरे राजनीतिक गणित को दर्शाता है। वे स्थानीय मुद्दों जैसे नीट पेपर लीक, छात्रा की कथित हत्या और भरत तिवारी एनकाउंटर को आधार बनाकर सत्ता पक्ष को घेरने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन उनकी असली ताकत उन मतदाताओं को साधने में निहित है जो पारंपरिक रूप से बड़े दलों से दूर रहते हैं।
उदासीन मतदाताओं को लुभाने की रणनीति
प्रशांत किशोर की प्राथमिकता उन लगभग 60 प्रतिशत मतदाताओं को अपने पक्ष में करना है, जिन्होंने पिछले चुनाव में मतदान ही नहीं किया था। आंकड़ों के अनुसार, बांकीपुर विधानसभा सीट पर पिछले चुनाव में करीब 1.75 लाख लोगों ने वोट नहीं डाला था, जो कुल मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा है। प्रशांत किशोर का मानना है कि जो वोटर न तो एनडीए और न ही महागठबंधन के प्रति उत्साह दिखाते हैं, उन्हें सक्रिय करके बाजी पलटी जा सकती है। वे इन्हीं गैर-मतदाताओं को बूथ तक लाने के लिए एक विशेष योजना पर काम कर रहे हैं।
सवर्ण वोटों पर प्रशांत किशोर का दांव
रणनीतिकार प्रशांत किशोर का मुख्य लक्ष्य सवर्ण वर्ग के मतदाता हैं, जिनमें ब्राह्मण, भूमिहार और राजपूत समुदायों की अच्छी खासी संख्या है। बांकीपुर में लगभग 7 प्रतिशत ब्राह्मण, 7 प्रतिशत भूमिहार और 5 प्रतिशत राजपूत मतदाता हैं, जो कुल मिलाकर करीब 63,000 वोटों का आधार बनाते हैं। हालिया घटनाओं जैसे नीट परीक्षा धांधली और एनकाउंटर मामले को उठाकर वे इन समुदायों के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इन मुद्दों के जरिए वे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर सवर्णों को अपने पाले में करने का प्रयास कर रहे हैं।
मुस्लिम मतदाताओं को जोड़ने का प्रयास
सवर्णों के साथ-साथ प्रशांत किशोर की नजर बांकीपुर के 10 प्रतिशत मुस्लिम वोट बैंक पर भी है। वे इन मतदाताओं को विश्वास दिलाने के लिए राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने और भविष्य की लाभकारी योजनाओं का वादा कर रहे हैं। हालांकि, बांकीपुर को भाजपा का गढ़ माना जाता है, जहाँ विधायक नितिन नवीन का मजबूत जनाधार और कार्यकर्ताओं की एक विशाल फौज मौजूद है। इस स्थिति में, प्रशांत किशोर के लिए इस किले को भेदना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसके लिए वे पूरी तरह से नई रणनीति और जमीनी समीकरणों पर निर्भर हैं।

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