भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट की एंट्री, अर्जी पर सुनवाई से बढ़ी उम्मीदें
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर से जुड़े मामले में शुक्रवार की नमाज के स्थान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मुस्लिम पक्ष ने स्थानीय प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए इस मुद्दे को लेकर सीधे सर्वोच्च अदालत का रुख किया है। अर्जी दाखिल होने के बाद अदालत से इस विषय पर तुरंत संज्ञान लेने का अनुरोध किया गया था, जिसे स्वीकार करते हुए शीर्ष अदालत ने इस पर अतिशीघ्र सुनवाई करने का फैसला किया है।
भोजशाला में नमाज के स्थान को लेकर सर्वोच्च अदालत में नई अर्जी
मुस्लिम समाज की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्थानीय प्रशासन सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं कर रहा है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि भोजशाला परिसर के बिल्कुल निकट ही शुक्रवार की नमाज अदा करने के लिए कोई सुरक्षित व खुली जगह उपलब्ध कराई जाए। इसके विपरीत, जिला प्रशासन ने भोजशाला से लगभग दो किलोमीटर दूर स्थान चिह्नित कर दिया है, जिससे नमाजियों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासनिक रवैये और अदालती आदेश की अवहेलना पर उठे सवाल
दायर अर्जी में कहा गया है कि दो किलोमीटर दूर जगह देना अदालती आदेश की मूल मंशा के खिलाफ है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि शीर्ष अदालत प्रशासन को कड़ा निर्देश जारी करे ताकि भोजशाला के पास ही कोई उपयुक्त स्थल आवंटित किया जा सके। बुधवार को मामले की गंभीरता को देखते हुए वकीलों ने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष अर्जी पर जल्द सुनवाई का विशेष अनुरोध किया था, जिस पर अदालत ने सकारात्मक रुख अपनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 24 जुलाई को सुनवाई के लिए दी मंजूरी
सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की संवेदनशीलता और तात्कालिकता को समझते हुए याचिका को तुरंत सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया है। शीर्ष अदालत ने इस पूरे विवाद पर आगामी शुक्रवार, 24 जुलाई को औपचारिक सुनवाई करने पर सहमति जताई है। माना जा रहा है कि इस सुनवाई के दौरान प्रशासन को अदालत के समक्ष नमाज का स्थान दो किलोमीटर दूर तय करने की वजह और अपनी तैयारियों का ब्योरा देना होगा।
हाईकोर्ट के फैसले और सर्वोच्च अदालत के पूर्व आदेश की पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि इस पूरे विवाद की शुरुआत मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश से हुई थी जिसमें भोजशाला को वाग्देवी का मंदिर घोषित किया गया था। इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। हालांकि सर्वोच्च अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, लेकिन क्षेत्र में धार्मिक सौहार्द और संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से निर्देश दिया था कि पास में ही मुसलमानों को शुक्रवार की नमाज के लिए कोई खुली और उचित जगह उपलब्ध कराई जाए।

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