आजकल बच्चों को फास्ट और जंक फूड का शौक बढ़ता जा रहा है। इसका एक कारण तो यह है कि यह आसानी से उपलब्ध है और जल्दी बन जाता है। दूसरे इसका स्वाद जिसे बच्चे बेहद पसंद करने लगे हैं। वहीं अब एक नये अध्ययन में सामने आया है कि बच्चा खुशी और दुख की अवस्था में खाने के प्रति अगल-अलग तरीके से व्यवहार करता है। दुख की अवस्था में  ना केवल जंक फूड की तरफ अधिक आकर्षित होता है बल्कि सामान्य से ज्यादा खाता भी है। दुख और अवसाद की अवस्था में लोग ज्यादा खाने लगते हैं, इसे 'इमोशनल ईटिंग' कहा जाता है। इस दौरान अनहेल्दी फूड के सेवन का ज्यादा मन करता है। नए शोध में खुलासा हुआ है कि इमोशनल ईटिंग से ना केवल बड़े बल्कि बच्चे भी प्रभावित होते हैं। 
स्वभाव पर चल रही एक रिसर्च ने इस बात की पुष्टि की है कि बच्चा खुशी और दुख की अवस्था में खाने के प्रति अगल-अलग तरीके से व्यवहार करता है।  दुख की अवस्था में  ना केवल जंक फूड की तरफ अधिक आकर्षित होता है बल्कि सामान्य से ज्यादा खाता भी है।
पहले के शोधों में सामने आया था कि जो लोग अवसाद की अवस्था से गुजर रहे हैं, वे अनहेल्दी फूड खाते हैं जिससे मोटापे का शिकार हो जाते हैं। ज्यादा खाने की वजह से उनके अवसाद में बढ़ोत्तरी ही होती है और स्वास्थ्य भी खराब होता है। 
शोध के दौरान 4.5 साल से लेकर 9 साल तक के 91 बच्चों को शामिल किया गया। बच्चों को अलग-अलग ग्रुप में बांटा गया और सबको अलग-अलग मूड के फिल्म सीन दिखाए गए। इसमें पाया गया कि भावुक कर देने वाले सीन के दौरान बच्चों ने ज्यादा चॉकलेट खाए।