दुकान हो या दफ्तर, वहां का वास्तु यदि प्रकृति के अनुरूप हो, तो वहां की कार्यक्षमता बढ़ती है, धनलाभ भी बढ़ता है। वास्तु के अनुसार साफ-सफाई से लेकर दीवारों का रंग, दरवाजों की दिशा, उपकरणों का स्थान, कर्मचारियों व मालिक के बैठने की जगह समेत कई बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सबसे पहले बात करते हैं दिशाओं की। ऑफिस का मुंह उत्तर या पूर्व में खुले, तो इसे शुभ माना जाता है। कर्मचारियों की पीठ मुख्य द्वार की तरफ नहीं होनी चाहिए।

ऑफिस के प्रमुख या मालिक के सीट के पीछे ठोस दीवार होनी चाहिये। पीठ के पीछे और कंधे के बगल में दरवाजा, खिड़की, रोशनदान नहीं होना चाहिए। सिर के ऊपर जाल भी नहीं होना चाहिए। मुंह के ठीक सामने खिड़की का होना फिर भी फलदायी है। जब बैठें तो मुंह उत्तर या पूर्व की ओर होना चाहिए। उत्तर-पूर्व की स्थिति भी ठीक मानी जाती है।

दफ्तर में कम्प्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को आग्नेय कोण ( दक्षिण-पूर्व) में रखना चाहिए। वेटिंग या मीटिंग रूम बनाना हो तो वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) में बनायें। ऑफिस में किचन या कैंटीन दक्षिण-पूर्व दिशा में शुभ मानी जाती है। बाथरूम ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में नहीं होना चाहिए।

ऑफिस में घड़ी पूर्व या उत्तर की तरफ लगी होनी चाहिए। ऑफिस में ईशान कोण में एक छोटा-सा पूजा का स्थान होना चाहिए। सारे स्टाफ को 2 मिनट ही सही, पूजा स्थान पर प्रार्थना करना चाहिए।

ऑफिस में दीवारें, पर्दे, टेबल हल्के रंग के होने चाहिए। कभी भी हिंसक पशु-पक्षी, रोता हुआ इंसान, डूबता हुआ जहाज, ठहरे पानी की पेंटिंग नहीं होनी चाहिए। इनसे नकारात्मक ऊर्जा आती है। हंसते हुए बच्चे, किसी महापुरुष, बहते हुए पानी, खिलाड़ी आदि की तस्वीर लगानी चाहिए। आप प्रेरणा देने वाले वाक्य लिखकर टांग सकते हैं।

एक टेबल पर सिर्फ एक कर्मचारी को बैठना चाहिए।

ऑफिस में काम आने वाली चीजें जैसे फैक्स, कंप्यूटर, घड़ी, फोटोकॉपी मशीन, स्कैनर आदि बंद या गंदे ना रखें। रोजाना ऑफिस की सफाई करनी चाहिए।

अपनी मेज पर जरूरी फाइलें पूर्व-उत्तर की तरफ रखें। यदि लोगों से तालमेल अच्छा नहीं रहता, तो टेबल पर बांस का पौधा रखें।

अलमारी, रैक में फालतू सामान इकट्ठा न करें।