जंगल की खेती:खेत की सुरक्षा के लिए एक किसान ने मेढ़ पर लगाए थे सागौन के पौधे, देखादेखी छह हजार किसानों ने 10 लाख पेड़ उगा दिए
 

हरदा जिले में मेढ़ पर लगे सागौन के पेड़।

मध्यप्रदेश के हरदा में छह हजार किसानों ने महज 19 साल में बंजर भूमि पर सागवान के 10 लाख पेड़ लगाने में कामयाबी हासिल की है। निजी जंगल की यह सबसे बड़ी श्रृंखला बताई जा रही है। किसानों ने नौ किलोमीटर इलाके में सागवान के पेड़ लगाए हैं।

दरअसल, 19 साल पहले किसान गौरीशंकर मुकाती ने इसकी शुरुआत की थी। उन्होंने 2001-02 में खेत की सुरक्षा के लिए मेढ़ पर सागवान के पेड़ लगाए थे। इसके बाद उन्होंने दूसरे किसानों को भी इसके फायदे बताए। चूंकि किसानों को इसमें कुछ भी अतिरिक्त खर्च नहीं आ रहा था, तो उन्होंने भी सागवान के पौधे लगाने शुरू कर दिए।

मुकाती बताते हैं कि गेहूं-सोयाबीन की परंपरागत फसलों के अलावा सागौन के इन पेड़ों से भी किसानों को आर्थिक लाभ हो रहा है। पर्यावरणीय फायदा तो पूरे समाज को मिल ही रहा है। खंडवा जिले के हरसूद तहसील के भी लगभग एक हजार किसान एक लाख पेड़ उगा चुके हैं।

निजी जंगल की सबसे बड़ी श्रृंखला

मुकाती बताते हैं कि इस पहल का असर लोगों पर देखा जा रहा है। इतना बड़ा जंगल बेहद अकल्पनीय है। वह भी किसानों ने अपनी मेहनत से बनाया। अब लोग इन पेड़ों के साथ पुराने पेड़ों को बचाने के लिए भी आगे आ रहे हैं।
हरदा जिले के रामजीपुरा, बोरीसराय, धारूखेड़ी, शाहपुरा, छीतीपुरा के किसानों ने नौ किलोमीटर लंबी पेड़ों की श्रृंखला भी खड़ी कर दी है। संभवत: यह निजी जंगल की सबसे बड़ी श्रृंखला है। इसकी कीमत भी सौ करोड़ के आसपास है।
सागौन के पेड़ से दूसरी फसलों को नुकसान नहीं

बंदी मोहड़िया के किसान डॉ. सत्यनारायण बांके ने बताया, 'मैंने 2008 में मेढ़ पर 1350 सागौन के पौधे लगाए थे जो आज पेड़ बन चुके है। इसी गांव के पुरूषोत्तम बांके ने बताया, 'मेरे पेड़ की मोटाई लगभग 80 सेंटीमीटर तक है।' सिराली के महेशसिंह राजपूत ने कहा इन पेड़ों से दूसरी फसल लेने में कोई नुकसान नहीं है।
रोलगांव के सौरव उपाध्याय ने भी 2007 में सागौन के तीन हजार पेड़ लगाए थे। वे अपने फैसले से खुश हैं। महेंद्रगांव के रामकष्ण राठौर के अनुसार, ' हमने 500 पौधे लगाए थे, जो आज पेड़ बन गए है। मुझे जब भी पैसे की आवश्यकता होगी, मैं इन पेड़ों को कटवाकर बेच सकता हूं।
50 फीट तक लंबे हैं पेड़
किसान रामनिवास गौर और हरिविट‌ठल गौर ने बंजर जमीन पर सागौन के पौधे लगाए थे। वे बताते हैं कि आज यह पेड़ बन चुके है। 100 सेंटीमीटर तक की गोलाई वाले और 50 फीट तक की ऊंचाई वाले पेड़ देखते ही बनते है। कुछ दिन पहले ही 40 पेड़ कटवा दिए।

क्या मिला था... और क्या देकर जा रहे है?

आत्मनिर्भर किसान-आत्मनिर्भर कषि के साथ आम के आम गुठलियों के दाम की तर्ज पर सागौन पौधारोपण को बढ़ावा देने के लिए एक चर्चा का आयोजन 6 दिसंबर को सुबह 10 बजे मुकाती वन आच्छादित क्षेत्र झुमरखाली (शाहपुरा) हरसूद में रखा गया है। सुभाष मंच हरदा के इस आयोजन में मंत्री कमल पटेल, विजय शाह, विधायक संजय शाह, नारायण पटेल शामिल होंगे। साथ ही उड़ीसा के रिटायर्ड पीसीसीएफ डॉ. अजय महापात्रा और विक्रांत तिवारी भी मौजूद रहेंगे। चर्चा समन्वयक जिला पंचायत हरदा के पूर्व अध्यक्ष और प्रेरणास्त्रोत गौरीशंकर मुकाती व रिटायर्ड एपीसीसीएफ पीसी दुबे रहेंगे। इस आयोजन में नदियों के निरंतर सूखते स्रोत, ऊर्जा के पर्यावरणीय हितैषी स्रोत सहित अन्य विषयों पर चर्चा की जाएगी। कीटनाशक एवं उर्वरकों के अति एवं असंतुलित उपयोग से विषाक्त एवं जीवन रहित होती माटी, किसान की आय की अनिश्चतता चर्चा के मुख्य बिंदु रहेंगे। गौरीशंकर मुकाती का कहना है कि हमें सोचना होगा कि हमें क्या मिला था... और क्या देकर जा रहे है? मिट‌टी, पानी, पर्यावरण, किसान को लेकर इस आयोजन में चिंतन किया जाएगा।