'भोली बेन' के नाम से पहचान बना चुकीं सुश्री हेमलता शर्मा जी मालवी भाषा के प्रति पूर्णतः समर्पित हैं। वे मालवी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए फेसबुक पर निरंतर मालवी भाषा में सुविचार लिखतीं हैं, अपणो मालवों के नाम से ब्लाग एवं मालवी की आनलाइन क्लास चलाती हैं और साथ ही पत्र-पत्रिकाओं के लिए मालवी आलेख, व्यंग्य आदि लिखती हैं। नई पीढ़ी को मालवी बोली से रूबरू कराने के उद्देश्य से उन्होंने मालवी लोकोक्तियों एवं मुहावरे का संकलन कर पुस्तक आकार दिया है, जिसका नाम है 'अपणो मालवो'। बोली बेन ने मालवा क्षेत्र के लगभग एक हजार प्रचलित लोकोक्तियों और मुहावरों का संकलन कर उनका हिंदी में अर्थ भी दिया है, ताकि मालवी भाषा नहीं जानने वाले इन लोकोक्तियों और मुहावरों का अर्थ भलीभांति समझ सकें।
इस संकलन के प्राक्कथन में प्रो.शैलेंद्रकुमार शर्मा जी लिखते हैं कि लोकोक्ति या कहावत सुंदर रीति से कहीं गई उक्ति या कथन है, जिसकी लोक व्याप्ति कन्ठानुकंठ होती है। ये यूंही नहीं गढ़ ली जाती, बल्कि इनके पीछे अनेक सदियों का अनुभव और ज्ञान होता है। लोकोक्ति के पीछे कोई विशेष प्रसंग, कहानी या घटना होती है, उससे निकली बात बाद में लोगों की जुबां पर चढ़ जाती हैं।
यहां कुछ लोकोक्ति और मुहावरे प्रस्तुत है -
'असो सोनो कई काम को जिसे कान कटे'
(तकलीफ देने वाला लाभ किस काम का)
'अपणो तौसो,अपणो भरोसो' (अपनी तैयारी पर भरोसा रखना) 'अपणो ढेंढर देखणो नी ने दूसरा के निहारणो' (अपना दोष न देखकर, दूसरों का दोष देखना) 'औंधी खोपड़ी होणो'(किसी की सलाह न मानना) 'घर-घर माटी का चूल्हा' (कोई घर ऐसा नहीं जहां थोड़ा बहुत विवाद न होता हो) 'अंधा के चिराग दिखाणो'(मूर्ख को उपदेश देना) 'अटकल भिड़ानो'(उपाय सोचना) 'आठ-आठ आंसू रोणा'(बहुत पछताना) 'फुफाजी बणनो'(नाराज होना) 'सीदा मुंडा बात नी करणो' (किसी का मान-सम्मान न करना)

 भोली बेन ने इस संकलन को तैयार करने में काफी मेहनत मशक्कत की है और यह संकलन पाठकों को मात्र दस रुपये (सहयोग राशि) की मामूली कीमत पर उपलब्ध करवाकर काबिले तारीफ कृत्य किया है।
आशा है इस उपयोगी और संग्रहणीय संकलन का सुधि पाठकों द्वारा भरपूर स्वागत किया जाएगा।
इस सद्य प्रकाशित संकलन के लिए हेमलता शर्मा 'भोली बेन' को बहुत-बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं।  

समीक्षक - राम मूरत 'राही'

पुस्तक - अपणो मालवो (मालवी लोकोक्तियां एवं मुहावरे)
लेखिका - हेमलता शर्मा 'भोली बेन'
प्रकाशक - रंग प्रकाशन, इंदौर (मप्र)
मूल्य - ₹10 (सहयोग राशि)
पृष्ठ - 104