वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य, रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है तबसे नौतपा प्रारंभ होता है। नौतपा के इन नौ दिन तक सूर्य से तीव्र ऊर्जा निकलती है, जिससे गर्मी का प्रकोप बढ़ता है। इस बार 24 मई की रात्रि 2 बजकर 32 मिनट पर सूर्य जो है वह रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश कर रहा है। नौतपा की शुरुआत भले ही 24 मई 2020 की रात से हो जाएगी, लेकिन सूर्य की तपन का प्रभाव 25 मई 2020 से माना जाएगा। चूंकि सातवें दिन शुक्र ग्रह अस्त हो रहा है इसलिए इस बार नौतपा के नौ दिनों की बजाय सात दिनों तक ही सूर्य अपना तीव्र प्रभाव दिखाएगा। 

सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने के बाद के अगले 9 नक्षत्रों तक नौतपा का प्रभाव माना जाता है। इस बार सातवें दिन शुक्र ग्रह अस्त हो जाएगा। इसके चलते अंतिम दो दिन गर्मी का प्रकोप कम रहेगा। ज्योतिष गणना के मुताबिक सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में आने का प्रभाव गुरु और शनि की वक्री चाल पर पड़ता है। इसके चलते नौतपा खूब तपेगा लेकिन 30 मई को शुक्र अपनी ही राशि वृषभ में अस्त हो रहा है। इसके चलते गर्मी की तपन कम हो सकती है। हालांकि नौतपा के आखिरी दो दिनों के भीतर आंधी तूफान व बारिश होने की संभावना रहेगी। दरअसल, शुक्र देव रस प्रधान हैं, जो सूर्य के ताप को कम करेंगे।

 

ज्योतिष शास्त्र अनुसार रोहिणी नक्षत्र का अधिपति ग्रह चन्द्रमा और देवता ब्रह्मा है। सूर्य ताप तेज का प्रतीक है, जबकि चन्द्र शीतलता का। चन्द्र से धरती को शीतलता प्राप्त होती है। पण्डित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं को जब सूर्य चन्द्र के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश करता है, तो इससे उस नक्षत्र को अपने पूर्ण प्रभाव से ले लेता है। जिस वजह से पृथ्वी को शीतलता प्राप्त नहीं होती। ताप अधिक बढ़ जाता है। वैसे तो सूर्य 15 दिनों तक रोहिणी नक्षत्र में भ्रमण करता है, लेकिन शास्त्रीय मान्यता अनुसार प्रारंभ के नौ दिन ही नौतपा के तहत स्वीकार किए जाते हैं। साल में एक बार रोहिणी नक्षत्र की दृष्टि सूर्य पर पड़ती है। यह नक्षत्र 15 दिन रहता है लेकिन शुरू के पहले चन्द्रमा जिन 9 नक्षत्रों पर रहता है वह  दिन नौतपा कहलाते हैं। इसका कारण इन दिनों में गर्मी अधिक रहती है। चूंकि मई माह के अंतिम सप्ताह में सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी कम हो जाती है। इससे धूप और तीखी हो जाती है। नक्षत्रों के काल गणना को आधार मानने वाले प्राचीन ज्योतिष मत में परस्पर सांमजस्य बिठाने का प्रयास कर रहे हैं।

नवतपा के संबंध में कहा जाता है कि --

ज्येष्ठ मासे सीत पक्षे आर्द्रादि दशतारका।

सजला निर्जला ज्ञेया निर्जला सजलास्तथा।।

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में आद्रा नक्षत्र से लेकर दस नक्षत्रों तक यदि बारिश हो तो वर्षा ऋतु में इन दसों नक्षत्रों में वर्षा नहीं होती, यदि इन्हीं नक्षत्रों में तीव्र गर्मी पड़े तो वर्षा अच्छी होती है। 

भारतीय ज्योतिष में नवतपा को परिभाषित कर लिया गया है, चंद्रमा जब ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में आर्द्रा से स्वाति नक्षत्र तक अपनी स्थितियों में हो एवं तीव्र गर्मी पड़े, तो वह नवतपा है। 

नौतपा में गर्मी से मानसून रहेगा बेहतर---

ज्योतिषी मान्यता है कि नौतपा के दौरान यदि बारिश होती है तो मानसून के मौसम में सूखा पड़ने की संभावना रहती है और यदि नौतपा में भीषण गर्मी पड़े तो बारिश अच्छी होती है। इस साल करीब 45-50 दिनों तक अच्छी बारिश होने की संभावना है।

हमारे यहां धार्मिक परंपरा है कि नवतपा के इन दिनों में महिलाएं हाथ-पैरों में मेंहदी लगाती हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि मेंहदी की तासीर ठंडी होती है। मेंहदी लगाने से गर्मी से राहत मिलती है। नौतपा में सूर्य की गर्मी बहुत अधिक बढ़ जाती है, इसलिए प्राचीन समय से ही इन दिनों में मेंहदी लगाने की परंपरा है।

नौतपा का  वैज्ञानिक तथ्य  ---

वैज्ञानिक मतानुसार नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर आती हैं, जिस कारण तापमान बढ़ता है। अधिक गर्मी के कारण मैदानी क्षेत्रों में निम्न दबाव का क्षेत्र बनता है, जो समुद्र की लहरों को आकर्षित करता है। इस कारण ठंडी हवाएं मैदानों की ओर बढ़ती हैं। चूंकि समुद्र उच्च दबाव वाला क्षेत्र होता है, इसलिए हवाओं का यह रुख अच्छी बारिश का संकेत देता है। 

21 जून से आएगा मानसून--

इस साल 21 जून को सूर्य आद्रा नक्षत्र में प्रवेश कर रहा है। इस दिन से छत्तीसगढ़ समेत देश के हर इलाके में मानसून सक्रिय हो जाएगा।

नौतपा का प्रभाव---

तारीख ---नक्षत्र ---प्रभाव-----

25 मई मृगशिरा शाम को तेज गर्मी

26 मई राहू प्रधान मंगल सूर्खी गर्मी

27 मई गुरु प्रधान पुनर्वसु उमस वाली गर्मी

28 मई शनि प्रधान पुष्य तेज हवा, बूंदाबांदी

29 मई बुध प्रधान आश्लेषा तेज गर्मी

30 मई केतु प्रधान मघा उमस, तेज गर्मी

31 मई सूर्य प्रधान उत्तरा फाल्गुनी प्रचंड गर्मी, शाम को बारिश

01 जून चंद्र प्रधान हस्त बारिश की संभावना

2 जून मंगल प्रधान चित्रा उमस गर्मी

प्रभाव ---

इस वर्ष वक्री ग्रहों की स्थिति से बने संयोग रोहिणी में प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति बनाएंगे। इस बीच भीषण गर्मी के अलावा बारिश के भी संयोग बताए जा रहे हैं अर्थात रोहिणी गलेगी। इस बार ग्रहों की विकट स्थिति के कारण प्राकृतिक आपदाओं का दौर बना हुआ है। जिससे महामारी भीषण गर्मी, आंधी, तूफान के साथ हवा, आगजनी, हवाई दुर्घटनाएं, राजनैतिक उथल-पुथल की स्थितियां बनी हैं।

नौतपा : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार--

भारत में ऐसे बहुत लोगों का मानना है कि सूर्य वृष राशि में ही पृथ्वी पर आग बरसाता है और खगोल शास्त्र के अनुसार वृषभ तारामण्डल में यह नक्षत्र हैं कृतिका, रोहिणी और मृगशिरा (वृषभो बहुलाशेषं रोहिण्योऽर्धम् च मृगशिरसः) जिसमें कृतिका सूर्य, रोहिणी चंद्र, मृगशिरा मंगल अधिकार वाले नक्षत्र हैं इन तीनों नक्षत्रों में स्थित सूर्य गरमी ज्यादा देता है ।

अब प्रश्न यह कि इन तीनों नक्षत्रों में सर्वाधिक गरम नक्षत्र अवधि कौन होगा इसके पीछे खगोलीय आधार है इस अवधि में सौर क्रांतिवृत्त में शीत प्रकृति रोहिणी नक्षत्र सबसे नजदीक का नक्षत्र होता है। जिसके कारण सूर्य गति पथ में इस नक्षत्र पर आने से सौर आंधियों में वृद्धि होना स्वाभाविक है इसी कारण परिस्थितिजन्य सिद्धांत कहता है कि जब सूर्य वृष राशि में रोहिणी नक्षत्र में आता है उसके बाद के नव चंद्र नक्षत्रों का दिन नवतपा है।

ज्योतिष के सिद्धांत के अनुसार नौतपा में अधिक गर्मी पड़ना अच्छी बारिश होने का संकेत माना जाता है। अगर नौतपा में गर्मी ठीक न पड़े, तो अच्छी बारिश के आसार कम हो जाते हैं। इस बार वक्री ग्रह होने की वजह से कहीं-कहीं बादल फटने के समाचार भी मिलेंगे। कहीं वर्षा से जन-धन की हानि के योग भी बनते हैं। 

सूर्य की गर्मी और रोहिणी के जल तत्व के कारण मानसून गर्भ में आ जाता है और नौतपा ही मानसून का गर्भकाल माना जाता है। जिस समय में सूर्य रोहिणी नक्षत्र में होता है उस समय चन्द्र नौ नक्षत्रों में भ्रमण करते हैं, यही कारण है कि इसे नौतपा कहा जाता है।

-पंडित दयानन्द शास्त्री

उज्जैन 9039390067