12 मई : विश्व नर्सिंग दिवस   

आज विश्व नर्सिंग दिवस पर जबकि सारा विश्व कोविड-19 जैसी महामारी से जुझ रहा है नर्सिंग की सेवाओं ने इस कार्य की महत्ता को काफी आगे कर दिया है | आज नर्सिंग को भी इस युद्ध का योद्धा माना गया है और उनका सम्मान समाज में काफी ऊँचा हो गया है |                                 
स्वस्थ जनसंख्या का किसी भी राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान होता है| जनसंख्या के स्वास्थ्य के स्तर को अच्छा बनाए रखने के लिए विभिन्न सरकारी, गैर सरकारी संस्थान, योजनाएं, प्रोजेक्ट अपने-अपने स्तर पर कार्य करते हैंस्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में योगदान की हम बात करें,तो हमें नर्सों का चेहरा सामने आता है| यदि उन्हें चिकित्सा जगत की रीढ़ कहा जाए तो अतिशयोक्ति ना होगी| नर्सिंग का इतिहास बहुत प्राचीन है,हमेशा से ही रोगी व्यक्ति की देखभाल तथा सेवा के कार्य को समाज में आदर की दृष्टि से देखा जाता रहा है| चाहे यूनानी चिकित्सक हिप्पाकैटीज़ हो या चरक सभी ने रोगी की परिचर्या के महत्व को स्वीकार किया है| डॉक्टर को तो धरती पर भगवान का रूप माना जाता है क्योंकि वही मरीज का उचित इलाज कर उसको नवजीवन प्रदान करता है,परंतु मरीज के अस्पताल में आने के समय से ही नर्स ही डॉक्टर के प्रत्येक कार्य में सहायता करती है, मरीज से संबंधित डॉक्टर के सभी दिशानिर्देशों को सुनना, समझना और समय अनुसार उन को लागू करना नर्स की जिम्मेदारी होती है| एक नर्स ही होती है जो मरीज की परिवार के सदस्य की भांति पूरी निष्ठा, आत्मीयता और त्याग के साथ सेवा करती हैमरीजों की तकलीफों को समझकर उसे मनोवैज्ञानिक आधार पर संबल प्रदान कर सामाजिक और चिकित्सीय आधार पर फिट करने में नर्स की अहम भूमिका होती है|  
नर्सिंग अपने आप में एक चुनौती भरा काम है क्योंकि एक मरीज का जीवन उसके हाथ में होता है| उसकी जरा सी लापरवाही से मरीज की जान जोखिम में पड़ सकते हैं| मरीज के एडमिट होने के समय से लेकर,उसको एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाने,ले जाने,खून निकालने या चढ़ाने,दवा देने,अचानक बिगड़ती हुई स्थितियों में निर्णय लेने के समय नर्स को बहुत ही सूझबूझ, सावधानी और व्यावहारिकता बरतने की जरूरत होती है,जैसे-जैसे हमारी सामाजिक व्यवस्था जटिल होती जा रही हैं नित्य नई-नई बीमारियों के साथ चिकित्सा के नए-नए विभाग विकसित हो रहे हैं | जैसे-बाल रोग,हृदय रोग, अस्थि रोग, छय रोग, गर्भ विषयक,शल्य चिकित्सा, मस्तिष्क रोग, दहन संबंधित  रोग, आकस्मिक दुर्घटना,सामान्य औषधोपचार आदि विभिन्न क्षेत्रों में नर्सो की मुख्य भूमिका होती है| जिसे वे एक व्यवसाय के रूप में नहीं बल्कि सेवा मानकर पूरा करती हैं|

अपने काम के दौरान नर्स विविध भूमिकाओं में नजर आती हैं| कभी वह डाक्टर होती हैं,कभी मां,कभी बहन, कभी दोस्त,कभी अधिकारी,तो कभी मार्गदर्शक|  एक सफल नर्स में हमें विविध गुणों का भी समंवय  देखने को मिलता है| शारीरिक रूप से स्वस्थ होने के साथ-साथ मरीजों के दर्द और तकलीफों को समझने की उसमें काबिलियत होती है,मरीज के साथ अपनेपन और धीरज से पेश आना पड़ता है, सीखते रहने की ललक ही उसमें अपने काम के प्रति रुचि जागृत करती है,तत्काल निर्णय लेने की क्षमता,दूसरे के सलाह को सुनना,दोस्ताना स्वभाव ,सहनशक्ति,हिम्मत,पेशे में निपुणता,त्याग की भावना,तालमेल की भावना, सहनशक्ति के साथ हालातों के हिसाब से खुद को ढालना क्योंकि मरीज की परिचर्या करते समय कभी-कभी ऐसे हालात उत्पन्न हो जाते हैं कि मरीज की हालत अचानक खराब होने लगती है या मरीज अत्यंत उग्र होकर आक्रामक व्यवहार करने लगता है| वहीं कभी कभी मरीज के परिवार के सदस्य उत्तेजित होने लगते हैं जिसे उसे संभालना पड़ता है|  
 एक नर्स के लिए उसका काम उसकी सामाजिक जिम्मेदारी है, जिसे वह मरीजों की सेवा कर पूर्ण करती हैं| इस कार्य में उसे स्वाभाविक आनंद और आत्म संतोष मिलता है| अनेक ऐसे अवसरों जैसे जब कोई स्वस्थ बच्चा इस दुनिया में आता है तो नर्स को पारिवारिक सदस्य के सामान्य खुशी मिलती है,जब कोई ऑपरेशन सफल हो जाता है,या जब कोई ऐसा मरीज इसके ठीक होने की उम्मीद ना होने पर भी वह स्वस्थ होकर वापस जाता है,तब उसकी खुशी का ठिकाना नहीं होता| उसे यह महसूस होता है कि इन सब कार्यों में उसका भी योगदान है| उसके कठिन परिश्रम, त्याग और समर्पण को तब पूर्णता प्राप्त होती हैं जब मरीजों के परिजनों की बहुत सी दुआऐं उसे मिलती हैं जो उसकी खुशी को दुगना कर देती हैं| परंतु नर्स होने के साथ-साथ वह एक महिला भी है और उसके ऊपर पारिवारिक उत्तरदायित्व भी उतने ही अधिक है जितने सामाजिक | इन सबके बीच वह बेटी, बहन, पत्नी, मां,बहू की विविध भूमिकाओं को निभाते हुए अपने सामाजिक दायित्व के सफल संचालन का प्रयास करती है| अपनी व्यक्तिगत समस्याओं की परवाह किए बिना सेवा पथ की ओर मुस्कुराते हुए निकल जाती है| उसका यह कोशिश रहती है कि अपने काम के दौरान वह हमेशा प्रसन्न और ऊर्जावान दिखे,जिससे मरीजों में जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास हो| काम के प्रति उसमें पाई जाने वाली निष्ठा, त्याग, समर्पण का ही परिणाम है कि विश्व के सभी देशों में नर्सों की मांग बढ़ती जा रही है और नर्से भी पूरी सेवा भावना के साथ अपने उत्तरदायित्व का सफलतापूर्वक निर्वाहन कर विश्व में अपना परचम फहरा रहीं हैं|  
         

      -डा.सरिता सिंह     

  सहायक प्राघ्यापक