मध्य भारत प्रांत द्वारा प्रांतीय शैक्षिक कार्यशाला गूगल मीट पर आयोजित की गई । दो सत्रीय कार्यशाला में प्रथम प्रातः कालीन सत्र में कु. युक्ता रत्नपारखी द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। कार्यशाला में शामिल अतिथि डॉ.भरत शरणजी (अध्यक्ष निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग) श्री अशोकजी कड़ेल (क्षेत्रीय सह संयोजक) का परिचय डॉ. राजीव पंड्या ने दिया ।
कार्यशाला किस उद्देश्य से की जा रही है इसकी प्रस्तावना प्रांत अध्यक्ष डॉ. राकेश ढांड ने दी । शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की विकास यात्रा को महिला प्रकल्प की राष्ट्रीय संयोजक सुश्री शोभा पैठणकर ने प्रस्तुत किया उन्होंने बताया कि 2004 से शिक्षा बचाओ आंदोलन की शरुआत हुई इसके बाद  2007 में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का पंजीयन हुआ जिसने पांच विषयों को लेकर समाज एवं शिक्षा क्षेत्र में कार्य करना प्रारंभ किया। वर्तमान में 14 विषयों पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास कार्य कर रहा है ।यह उसकी 15 वर्षों की सक्रियता एवं सफलता का प्रतीक है ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. भरत शरण जी ने कहा कि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास शिक्षा एवं संस्कृति दोनों के उत्थान की बात कर रहा है ।उन्होंने नई शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं पर भी प्रकाश डाला तथा आत्मनिर्भर भारत के महत्व को उपयोगी एवं देश की उन्नति में सहयोग प्रदान करने वाला बताया। 
कार्यशाला में संभाग:श इंदौर, भोपाल ,ग्वालियर एवं उज्जैन संभाग के वृत निवेदन क्रमशः राम सागर मिश्रा ,विनोद मालवीय, राजकुमार वाजपई एवं आर.एम. शुक्ला ने प्रस्तुत किए जिसमें उन्होंने कोरोना संक्रमण काल में न्यास द्वारा किए गए आर्थिक, सामाजिक सेवा प्रकल्प को बताया इसमें मुख्य रुप से झाबुआ एवं ग्वालियर द्वारा  एक एक लाख रुपए प्रधान-मंत्री सहायता कोष में जमा करने ,भोजन सामग्री, दवाइयां एवं अन्य सेवा कार्यक्रमों का उल्लेख किया । 
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा चलाए जा रहे 14 प्रमुख विषयों के प्रांत संयोजको ने विषय से संबंधित प्रांत में होने वाले कार्यक्रम का विवरण प्रस्तुत किया।
 झाबुआ न्यास का एक प्रतिमान केंद्र है जिसका विवरण सुश्री अंबिका टवली  में प्रस्तुत किया और उन्होंने बताया कि बिना शिक्षक परीक्षा ,प्लास्टिक का बहिष्कार और ड्रोन की सहायता से दवाई छिड़काव जैसे महत्वपूर्ण कार्य झाबुआ में किए गए हैं। माननीय प्रधानमंत्रीजी के स्वप्न आत्मनिर्भर भारत को शिक्षा संस्कृति उठाया द्वारा जन जन तक  पहुंचाने हेतू आत्मनिर्भर झाबुआ कार्यक्रम झाबुआ में दिनांक 2 अक्टूबर 2020 को किया गया ।जिस का विवरण प्रस्तुत करते हुए क्षेत्रीय सह संयोजक श्री ओमजी शर्मा ने बताया कि इस हेतू पहले शिक्षकों की बैठक, विषय चयन , टोली निर्माण , प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन के बारे में कार्य हुआ।
तदुपरांत सामाजिक संगठन, शिक्षाविदो की समिति बनाई गई। और अंततः शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव ,अतुल भाई कोठारी  की अध्यक्षता एवं सांसद ,कलेक्टर ,श्री अशोकजी कडेल,  श्री सुरेशजी गुप्ता के सानिध्य में कार्यक्रम संपन्न हुआ। जिसमें सौ छात्रों ,साठ शिक्षको एवं डेढ़ सौ सहयोगियों ने सहभागिता की ।
प्रथम सत्र में  लगभग 245 प्रतिभागियों की उपस्थिति रही एवं 240 प्रतिभागियों ने फ़ेसबुक पर इसे लाइव देखा । कुल पंजीयन 534 हुए। 

द्वितीय सत्र में अध्यक्षीय उद्बोधन श्री देशराजजी जैन राष्ट्रीय संयोजक चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व विकास शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली के द्वारा दिया गया इस अवसर पर आपने व्यक्ति के संपूर्ण विकास के लिए देश काल समाज एवं परिवार के इतिहास की जानकारी को अपेक्षित बताया साथ ही साथ आपने शिक्षा के स्तर की गुणवत्ता को बढ़ाने हेतु मध्य भारत प्रांत में सभी विषयों की संकल्पना के अनुसार किए जा रहे कार्यों को सराहनीय बताया आपने विशेष रुप से नवीन  राष्ट्रीय शिक्षा नीति को वास्तविक रुप से भारत की स्वतंत्रता का पायदान बताया की इस नीति के द्वारा वास्तविक रुप से भारत की सांस्कृतिक विरासत एवं उच्च गुणवत्ता जीवन मूल्यों  का समावेश किया गया है विशेष रुप से आपने चरणबद्ध रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपने संस्थान विश्वविद्यालय राज्य एवं संपूर्ण देश में किस प्रकार  क्रियान्वित की जाए इसकी चरण बद्ध योजना परिणाम एवं परिणाम के प्रभावों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। 
 शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के मध्य भारत प्रांत के संयोजक श्री अशोक भाई  कड़ेल  ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर प्रकाश डालते हुए इस नीति की मुख्य बातों पर विचार साझा किए साथ ही साथ आपने बताया की आत्म निर्भर भारत के संबंध में 11 विश्वविद्यालय को प्रतिमान केंद्र बनाने की पहल की गई है एवं इस कड़ी में आत्म निर्भर झाबुआ कार्यक्रम में सभी वर्गों के प्रतिनिधित्व को सम्मिलित करते हुए उद्घोष कर दिया गया है इस अवसर पर विभिन्न शिक्षाविदों ने नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन हेतु सुझाव प्रेषित किए जिसमें सफल उद्यमी की जानकारी स्थानीय परिवेश की जानकारी एवं स्थानीय परियोजनाओं की जानकारी प्राथमिक स्तर की कक्षाओं मे  दी  जाए प्रतियोगी परीक्षा में शिक्षकों के बच्चों के लिए अलग से प्रावधान रखा जाए सीएसआर जैसे ही एस आर लागू किया जाए मातृभाषा में शिक्षा की प्रमुखता आदि सजा किए गए। सभी विषय प्रमुखों ने आगामी कार्यक्रम की रूपरेखा भी प्रेषित की साथ ही माननीय अशोक भाई द्वारा नवनियुक्त पदाधिकारियों की घोषणा की गई कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर राजेश वर्मा एवं डॉक्टर प्रियदर्शनी अग्निहोत्री द्वारा किया गया एवं आभार प्रदर्शन धीरेंद्र कुमार भदोरिया द्वारा किया गया।