नई पीढ़ी के कंधों पर अधिक ज़िम्मेदारी है कविता की- श्री यादव 

इंदौर। 'कविता और कवि सम्मेलनों में आज संयोजक मिल रहे हैं तो बड़ी बात है अन्यथा हमारे दौर में एक ही बाल कवि सम्मेलन होता था इंदौर में। इसीलिए नई पीढ़ी के कंधों पर अधिक ज़िम्मेदारी है।' उक्त बात मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा आयोजित 'बसन्त उत्सव' में स्थानीय देवपुत्र भवन, संवाद नगर में रविवार को मुख्य अतिथि राष्ट्रीय कवि शशिकांत यादव ने कही। आयोजन में विशिष्ट अतिथि के तौर पर मातृभाषा उन्नयन संस्थान की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. नीना जोशी, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष शिखा जैन एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य नितेश गुप्ता रहे।

बसन्त उत्सव में मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा कवि शशिकांत यादव को स्वर्णाक्षर सम्मान से सम्मानित किया गया।
कवि सम्मेलन में इंदौर से अंकिता यादव, शिवपुरी से आकाश यादव, दतिया से ब्रजेश मस्ताना, शाजापुर से राहुल कुम्भकार, दिल्ली से मनीषा सक्सेना, इंदौर से शरीफ़ कैफ़, रीवा से संदीप सांदीपनि, झाबुआ से हिमांशु हिन्द एवं ब्यावरा से कन्हैय्या राज ने काव्य पाठ किया। 


बसन्त उत्सव कवि सम्मेलन में अंकिता यादव का पहला काव्य-संग्रह 'काव्यात्रा' का विमोचन हुआ। 
उत्सव के संयोजक संदीप सांदीपनि ने बताया कि 'यह हिन्दी कवि सम्मेलन की चौथी पीढ़ी है, जो श्रेष्ठ काव्य अनुष्ठान के माध्यम से हिन्दी का प्रचार-प्रसार कर रही है।' 
 फ़ोर्स डिफ़ेंस अकादमी, अतुल्य अकादमी एवं ए टू ज़ेड समूह की सहभागिता से इस काव्य उत्सव का आयोजन संपन्न हुआ । बसन्त उत्सव के सफल आयोजन में मातृभाषा उन्नयन संस्थान के कवि गौरव साक्षी, जलज व्यास की महत्ती भूमिका रही।