ज्योतिष में और हमारी संस्कृति में सूर्य का आद्रा नक्षत्र में आना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। सूर्य ऊर्जा व प्रकाश के प्रतीक हैं। आरोग्य के कारक हैं। और जीवन में उम्मीद के संवाहक हैं। सूर्य को संसार की आत्मा कहा जाता है। ज्योतिष में सूर्य के राशि बदलने और नक्षत्र बदलने पर खास ध्यान दिया जाता है और इस आधार पर ज्योतिर्विद् स्थितियों का आकलन भी करते हैं, भविष्यवाणी भी करते हैं और इसका धार्मिक महत्व भी होता है। सूर्य साल में सभी राशियों और नक्षत्रों से होकर गुजरते हैं लेकिन आद्रा नक्षत्र में उनका प्रवेश बहुत अहम होता है। उस दिन भगवान शंकर और विष्णु की पूजा की जाती है । उन्हें खीर- पूरी और आम का भोग लगाया जाता है।

सूर्य जब आर्द्रा नक्षत्र पर होता है, तब पृथ्वी रजस्वला होती है। जो उत्तम वर्षा का प्रतीक है। अमूमन जून माह के तीसरे सप्ताह में आद्रा नक्षत्र का उदय होता है। तब प्रचंड गर्मी से लोगों को राहत मिलने की संभावना बनने लगती है। मौसम में परिवर्तन नजर आने लगता है। पुरवाई हवा के साथ मौसम में उमस और थोड़ी नमी महसूस होने लगती है। वैसे भी आद्रा का अर्थ होता है- नमी।

आद्रा नक्षत्र उत्तर दिशा का स्वामी है और वैदिक ज्योतिष के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी राहु ग्रह है. यह आंसू की तरह दिखायी देता है। हमारे आकाश मंडल में ब्रहमांड में 27 नक्षत्र हैं आद्रा नक्षत्र को छठा नक्षत्र माना जाता है। यह मृगशिरा और पुनर्वसु नक्षत्र के बीच में है। हमारे शास्त्रों में और खासकर वामन पुराण में यह कहा गया है कि आद्रा नक्षत्र का भगवान विष्णु के केशों में निवास है और इस नक्षत्र को जीवनदायी कहा जाता है। जब सूर्य आद्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं तो संपूर्ण उत्तरी भारत के राज्यों में खीर और आम खाने की परंपरा है। लोग इसे बहुत शुभ मानते हैं। पाप ग्रह राहु के आद्रा नक्षत्र में आने को जहां महामारियों और अनिष्ट का कारक माना जाता है, वहीं सूर्य के इस नक्षत्र में आने को शुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार साल में 6 महीने सूर्य उत्तरायण और 6 महीने दक्षिणायन में रहते हैं। सूर्य का दक्षिणायन में आना वर्षा ऋतु का भी शुभारंभ माना जाता है और आद्रा नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश वर्षा कारक योग का निर्माण करता है। किसानों को भी सूर्य के आद्रा नक्षत्र में प्रवेश का बड़ी शिद्दत से इंतजार रहता है।

22 जून को दोपहर 1:8 पर सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इसी दिन शुक्र राशि परिवर्तन करेंगे। इसके एक दिन पूर्व 20 जून को देव गुरु बृहस्पति वक्री होंगे। शनिदेव पहले ही वक्री चाल चल रहे हैं ।।तो उपरोक्त ग्रह योग के प्रभाव होने से षड्यंश्री ग्रहण योग भी बनेगा। सूर्य के आद्रा नक्षत्र में आने से सभी 12 राशियों पर प्रभाव पड़ेगा। मेष ,कन्या व मकर के लिए उनका आद्रा नक्षत्र में आना शुभ रहेगा। वृषभ, कन्या व कर्क राशि वालों को धन हानि के प्रति सचेत रहना होगा जबकि वृश्चिक राशि वालों के लिए समय थोड़ा कष्टकारी रहेगा। अन्य सभी राशि वालों को मिले जुले परिणाम मिलेंगे।