5 अगस्‍त यानी कल अयोध्‍या में भव्‍य श्रीराम के मंदिर की आधारशिला रखी जाएगी। यही वजह है कि सूर्यकुंड धाम पर दो दिवसीय रामचरित मानस पाठ का शुभारंभ हो गया है। सूर्यकुंड को ऐतिहासिक कुंड माना जाता है। इसका उल्‍लेख वा‍ल्‍मीकि रामायण में भी मिलता है। भगवान श्रीराम ने यहां पर रात्रि विश्राम के साथ सूर्योपासना की थी।

गोरखपुर के सूर्यकुंड विकास समिति और भक्‍तों ने रामचरित मानस का पाठ शुरू किया है। पिछले साल 18 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूर्यकुंड धाम के विकास के लिए 2.7 करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास किया था। यह धाम भगवान राम से जुड़ा हुआ है। यह स्थल बहराइच , यमुनोत्री, हरियाणा, दिल्ली और बिहार सहित देश के 26 ऐतिहासिक सूर्यकुंड में से एक है।
सूरजकुंड विकास समिति के संस्थापक और संयोजक संतोष मणि त्रिपाठी ने बताया कि पुरातत्‍व इतिहास है कि त्रेतायुग में इस जगह का नाम कामरूप रहा है। इसके बारे में वाल्‍मीकि रामायण में भी उल्‍लेख मिलता है।

एक पौराणिक कथा के मु‍ताबिक, राज्‍यारोहण के दौरान भगवान श्रीराम ने 7 कुंड वाले इस पोखरे में स्‍नान किया था। इसके बाद उन्‍होंने यहां पर पिंडी स्‍थापित कर भगवान सूर्य का आह्वान किया। तभी से इस कुंड का नाम सूर्यकुंड पड़ गया।

संतोष मणि त्रिपाठी बताते हैं कि अब जब राम जन्मभूमि की नींव पड़ने वाली है। यही वजह है कि भक्तों ने राम चरित्र मानस पाठ शुरू कर दिया है। पूरे विधि विधान के साथ पूजन का कार्य किया जा रहा है। वे बताते हैं कि ये मर्यादा पुरुषोत्‍त्म भगवान राम की लीला स्‍थली है। वे यहां पर ये भी कामना कर रहे हैं कि कोरोना महामारी से पूरी दुनिया को मुक्ति दिलाएं।