विश्व संग्रहालय दिवस - 18 मई 2020

         वक्त जो भी घटित करा दे कम है, वक्त से आज तक कोई नहीं जीत सका है वक्त से जिसने भी टकराने की कोशिश की है उसका नामो-निशान ढूंढना मुश्किल हो रहा है, फिर इंसान की क्या बिसात। आज हम देख रहे हैं कि सारी दुनिया पर धौंस जमाने वाला देश वक्त के आगे सिर झुका कर, गिड़-गिड़ा कर अपने देशवासियों के जान की भीख मांग रहा है। इसी प्रकार जिसने भी दुनिया में संग्रहालय की स्थापना एवं उद्देश्य को लेकर कल्पना तद्उपपरांत उसे धरातल पर साकार किया होगा, उसने भी कभी सपने में नहीं सोचा होगा कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब एक अदृश्य महामारी से बचाव उपाय अंतर्गत संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर ताला जड़ दिया जावेगा।

         जी हां हम बात कर रहे हैं संपूर्ण संसार में प्रत्येक वर्ष 18 मई को मनाए जाने वाले विश्व संग्रहालय दिवस की। चूकिं ऐतिहासिक एवं पर्यटन नगर चंदेरी में भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (भारत सरकार) द्वारा स्थापित एवं संचालित चन्देरी नामक संग्रहालय आमजन को अतीत से परिचय कराता हुआ कार्यरत है। जग जाहिर है कि विश्वव्यापी महामारी कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम उपाय अंतर्गत भारत सरकार द्वारा माह मार्च में जारी दिशा निर्देशों अनुसार चंदेरी संग्रहालय 17 मार्च से आमजन प्रवेश हेतु प्रतिबंधित होकर पूर्णरूपेण बंद है। वर्तमान में भी संपूर्ण भारत में लाकडाउन प्रभावशील है, आवागमन के सभी साधन बाधित हैं। ऐसी परिस्थितियों में प्रतिवर्ष विश्व संग्रहालय दिवस के मौके पर चंदेरी संग्रहालय में आयोजित होने वाला समारोह इस वर्ष आयोजित होगा अथवा नहीं, कहा नहीं जा सकता। देश की वर्तमान परिस्थितियां, मानवता पर आए संकट दौरान वरियताक्रम में राष्ट्र और मानवता सर्वोपरि। अतएव समारोह आयोजित होना अथवा ना होना कोई ज्यादा मायने नहीं रखता। कोरोना से बचाव हेतु *घर में रहें सुरक्षित रहें*  ऐसे हालातों में बेहतर होगा कि विश्व संग्रहालय दिवस के अवसर पर चंदेरी संग्रहालय के बारे में जानकारीयां साझा कर उसे समझा जावे।

          चन्देरी पर्यटन को बढ़ावा देने उद्देश्य के साथ ही चन्देरी क्षेत्र में बिखरी पड़ी पुरा संपदा को एकत्रित कर संग्रहालय के माध्यम से आमजन को चंदेरी की गौरवमयी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक पहचान को यथावत रखने के अलावा जन जागरण, सांस्कृतिक विरासत के प्रति जनचेतना जनजागृति के उद्देश्य को दृष्टिगत रखते हुए बीसवीं सदी के अंतिम दशक में तत्कालीन क्षेत्रीय सांसद एवं चंदेरी को पर्यटन राह पर लाने की ललक रखने वाले श्री माधवराव सिंधिया के अथक एवं सफल प्रयासों के फलस्वरूप नगर से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्राचीन सिंहपुर महल में संग्रहालय की स्थापना हुई और 3 अप्रैल 1999 ईस्वी को संग्रहालय आमजन के समक्ष प्रस्तुत हुआ। इस महल में संग्रहालय को विभिन्न गैलरिओं में विभक्त कर प्रत्येक गैलरी में उसके शीर्षक नामानुसार एवं कालक्रमानुसार पुरा संपदा को प्रदर्शित किया गया।

             पूर्व में लोक निर्माण विभाग की संपत्ति सिंहपुर महल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को हस्तांतरित हो जाने के कारण संग्रहालय के अलावा महल को यह फायदा हुआ कि उसके मूल स्वरूप से कोई छेड़छाड़ ना करते उसका जीर्णोद्वार हुआ, विद्युत एवं जल की उपलब्धता सुनिश्चित हुई एवं महल परिसर में सुंदर आकर्षित उद्यान विकसन हुआ। याद रहे यह वही महल है जिसे अब मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा हेरिटेज होटल के रूप में विकसित करने की कवायद जारी है।

           सब कुछ चन्देरी पर्यटन के पक्ष में होते हुए संग्रहालय को वह आशातीत सफलता प्राप्त नहीं हुई जिसकी उम्मीद सरकार एवं पर्यटन प्रेमियों ने लगा रखी थी। कारण रहा नगर से दूरी, आवागमन के पर्याप्त साधन की उपलब्धता ना होना, मुख्य सड़क से दूरी, आसपास जंगल की मौजूदगी फल स्वरुप भय का भूत, सुरक्षा का अभाव वगैरह-वगैरह। नतीजा यह निकल कर सामने आया कि संग्रहालय के प्रति आमजन की रूचि नाम मात्र अर्थात् बेहद निराशाजनक रही। परिस्थितिवश संग्रहालय को सिंहपुर महल से चंदेरी स्थानांतरित करने की सहमति उपरांत योजना पर कार्यवाही सफलता पूर्वक आगे बढ़ी और तत्कालीन क्षेत्रीय सांसद श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सफल प्रयासों के फलस्वरूप राज्य मार्ग क्र. 10 एवं राज्य मार्ग क्र. 19 (अब राष्ट्रीय मार्ग क्र. 346) के मध्य मार्ग मिलन स्थल निकट रिक्त शासकीय भूमि पर नवीन संग्रहालय भवन निर्माण उपरांत सितंबर 2008 ईस्वी में स्थानांतरित हुआ।

           मध्यप्रदेश में ग्वालियर, खजुराहो एवं सांची के बाद अस्तित्व में आए चन्देरी संग्रहालय के इस दो मंजिला भवन में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा चयनित विभिन्न प्रकार की पुरा संपदा का सुव्यवस्थित ढंग से प्रस्तुतीकरण किया गया है। इन पुरावशेषों में खासतौर से पाषाण काल उपकरण, हिंदू एवं जैन प्रतिमाएं, मांडू एवं सिंधिया राज्यों की मुद्राएं, प्रतिहारकालीन मध्यकालीन अभिलेखों को प्रदर्शित किया गया है। वर्तमान संग्रहालय में पांच गैलरियां क्रमश: चन्देरी का इतिहास, विष्णु, शैव एवं शाक्त, जैन एवं विविध गैलरी है जिनमें नामानुसार प्रतिमाएं अन्य सामग्री को रखा गया है। विविध गैलरी में कई तरह के प्राचीन लौह, आयुद्ध उपकरण, मुद्राएं सिक्के सहित चंदेरी हस्तशिल्प कला का नायाब नमूना चंदेरी साड़ी बुनाई कला को परिचित कराने हेतु चंदेरी साड़ी कार्नर स्थापित किया गया है। इन सबके अलावा ढेर सारी प्रतिमाएं शिलालेख आदि संग्रहालय के बरामदों, प्रांगण के साथ ही संग्रहालय के सामने रिक्त भूभाग में प्रदर्शित हैं। एक बरामदा में प्राचीन भारत से वर्तमान भारत तक तथा उसके राज्यों की सीमाओं को मानचित्र के माध्यम से कालक्रम अनुसार संपूर्ण इतिहास की क्रमवत जानकारी प्रस्तुत है। संग्रहालय में व्याख्यान केंद्र, खुला मंच, अतिथि कक्ष,  पुस्तकालय के साथ ही कार्यालय सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद् कार्यरत है।

        विशाल भू-भाग, चारों ओर से सुरक्षा दीवार सहित संग्रहालय के सम्मुख दाएं बाएं भाग में सुंदर उद्यान विकसन, स्वच्छ स्वस्थ वातावरण संग्रहालय की शोभा में चार चांद लगाने के पर्याप्त सहायक बिंदु बनकर उभरते हैं। चौबीस घंटे सुरक्षाकर्मियों के अलावा सतत निगरानी रखते कैमरों की नजर में समाया संग्रहालय की विशेषता है उसकी वास्तुकला। जो बाहर से ही पर्यटकों के अलावा आम जन को आकर्षित करती है। दरअसल चंदेरी को चंदेरी साड़ियों के अलावा पत्थरों का नगर भी कहा जाता है और यह कोई अतिश्योक्ति न होकर एक हकीकत है जिसके प्रमाणिक साक्ष्य नगर एवं नगर के चारों ओर विद्यमान हैं। अतएव यह पूर्व निर्धारित तथ्य रहे हैं कि चंदेरी की पत्थर पहचान यथावत रहे अस्तु नगर में निर्मित शासकीय भवनों में पत्थर को वरीयता प्रदान की जाती रही है। जिसकी सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति रही है संग्रहालय भवन जिसके निर्माण में चुन-चुन कर, तराश कर  पत्थरों को  उपयोग किया गया है जो संग्रहालय भवन की सुंदरता में इजाफा करते हैं।

          चंदेरी संग्रहालय चंदेरी पर्यटन की जान है। नगर में आने वाला प्रत्येक पर्यटक, शोधार्थी-खोजार्थी, अध्ययनरत छात्र-छात्राएं आदि संग्रहालय से रू-ब-रू होकर अपने ज्ञान, जिज्ञासाओं का समाधान कर अतीत से साक्षात्कार करते हुए विभिन्न प्रकार की जानकारियों को अपने दामन में बांधकर वापस अपने घर लौटते हैं।

 *फायदा* -- नगर में एक मुख्य पर्यटन केंद्र बनकर उभरने से चंदेरी पर्यटन को अच्छा-खासा बढ़ावा मिला। आंकड़े गवाह हैं जहां सिंहपुर महल में वर्ष भर में चार अंक का आंकड़ा छूने के लिए पर्यटकों के लाले पड़ जाते थे, वहीं चंदेरी में जनवरी 2020 से 16 मार्च तक यानी कोरोना वायरस प्रकोप से बचाव हेतु बंद के पूर्व मात्र ढ़ाई माह में तेरह हजार से अधिक पर्यटक संग्रहालय से रूबरू हो चुके थे।

 *मांग* -- वैसे तो यहां आने वाले वरिष्ठ नागरिक, महिला पुरूष, बाल- बालिकाओं के लिए बुनियादी सुविधाएं मसलन- पृथक-पृथक प्रसाधन, बैठक व्यवस्था, शीतल जल( वाटर कूलर) दिशा सूचक यंत्र,  इत्यादि की उपलब्धता है। अतिरिक्त  इसके परिसर में मौजूद सदियों से मनुष्य को अपनी ठंडी छांव प्रदान करते खिन्नी के पेड़ चारों ओर हरी हरी घास सहित उद्यान दो पल सुकून के साथ बैठने को विवश करते है। सब कुछ अच्छा भला उपरांत भी चंदेरी पर्यटन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (भारत सरकार) से पर्यटक सुविधा विस्तार, सार्वजनिक हित में संग्रहालय वातानुकूलित किए जाने की मौन किंतु ठोस मांग करता है।          

 - मजीद खां पठान

सदस्य, जिला पर्यटन संवर्धन परिषद  चन्देरी मध्यप्रदेश