त्रासदी की शिकार विधवाओं की कॉलोनी से रिपोर्ट:गैस कांड में पति, सास, तीन बच्चों को खोने वाली चिरौंजी कहती हैं- जिंदा रहने हर दिन जद्दोजहद


भोपाल में गैस कांड की पीड़ित 85 साल की चिरौंजी बाई त्रासदी में अपने पति, तीन बच्चे और सास को खो चुकी हैं। अब तो रो-रोकर उनके आंसू भी सूख चुके हैं।
4650 गैस पीड़ित विधवाओं को एक साल से नहीं मिली पेंशन
कोरोनाकाल में मांगकर मिटाई भूख

85 साल की चिरौंजी बाई गैस त्रासदी में सास, पति, बड़ी बेटी, दो बेटों को खो चुकी हैं। उस त्रासदी पर बात करते हुए आंखें डबडबा आती हैं। चिरौंजी बाई कहती हैं, छोटे बेटे राजवीर और बहू आरती के सहारे जीवित थी, लेकिन पिछले साल छोटे बेटे राजवीर की मौत से मेरी जीने की रही सही उम्मीद भी खत्म हो गई है। कभी-कभी लगता है कि मैं अब तक जीवित कैसे हूं। किसके सहारे जिऊं, समझ नहीं आता। गैस कांड ने मेरी सास 70 साल की गूंगाबाई, पति महाराज सिंह, बड़े बेटे हंसराज, बड़ी बेटी सुधा को लील लिया। इस बेसहारा महिला को एक साल से पेंशन नहीं मिली है। कोरोना में पैसों का संकट इस कदर रहा कि मांग कर भूख मिटाई।

तस्वीर 24 अगस्त 2010 की है, जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान गैस राहत काॅलोनी में विधवा महिलाओं के बीच पहुंचे थे। ऐलान किया था कि विधवा बहनों के आजीवन 1 हजार रुपए पेंशन मिलेगी।
तस्वीर 24 अगस्त 2010 की है, जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान गैस राहत काॅलोनी में विधवा महिलाओं के बीच पहुंचे थे। ऐलान किया था कि विधवा बहनों के आजीवन 1 हजार रुपए पेंशन मिलेगी।
चिरौंजी बाई गैस पीड़ित विधवा हैं। वे अपने भरे-पूरे परिवार को गैस त्रासदी में खो चुकी हैं। इस बेसहारा महिला को एक साल से पेंशन नहीं मिली। इन्हीं की तरह 4650 महिलाएं पेंशन का इंतजार कर रही हैं। भोपाल में 36 साल पहले हुई गैस त्रासदी ने शहर की 5 हजार महिलाओं के जीवन का सहारा छीन लिया था, लेकिन अब ये महिलाएं एक और त्रासदी झेल रही हैं। जिंदा रहने के लिए हर दिन जद्दोजहद करनी पड़ रही है। बुढ़ापे का एकमात्र सहारा 1000 रुपए गैस पीड़ित विधवा पेंशन एक साल पहले बंद कर दी गई।

महिलाओं ने कहा कि पेंशन नहीं मिलने से उनकी जिंदगी मुश्किल हो गई है।

तत्कालीन कमलनाथ सरकार के समय ये पेंशन बंद हुई। शिवराज सरकार के वापस आने के बाद अब तक पेंशन शुरू नहीं कराई जा सकी। हालत ये है कि गैस पीड़ित महिलाओं को कोरोना काल में कई बार खाना मांगकर पेट भरना पड़ा। इन 5 हजार महिलाओं में से आज 4650 जीवित हैं। बाकी 350 महिलाएं बीमारी के कारण दुनिया से चल बसीं। विधवा महिलाओं ने मंगलवार को करोंद में हाउसिंग बोर्ड की कालोनी के सामने विधवा पेंशन की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया। उन्होंने हाथों में थाली-कटोरी ले रखी थी और साइन बोर्ड लिखवा रखा था, हमारी पेंशन चालू करो।

महिलाएं सभी स्तर पर आवेदन दे चुकी हैं। विरोध भी दर्ज कराया है। इन वृद्ध महिलाओं ने बताया कि बिना पेंशन के गुजारा मुश्किल हो गया है। बाहर से कोई मदद भी नहीं मिल रही है।

महिलाओं ने गैस राहत कालोनी के सामने हाथों में थालियां लेकर पेंशन शुरू करने की मांग की।

गैस राहत मंत्री सारंग ने कहा- महिलाओं के जल्दी ही 400 रुपए पेंशन मिलेगी

 पेंशन बंद होने को लेकर जब भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री विश्वास सारंग ने पूछा तो उन्होंने कहा- हम उन सभी महिलाओं को समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना से जोड़ रहे हैं। इन्हें 400 रुपए पेंशन दी जाएगी। जहां जीरो था, वहां अब उन्हें 400 रुपए मिलेंगे। पेंशन कब से शुरू होगी? सारंग यह नहीं बता पाए।

 

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने 2011 में इन्हीं महिलाओं से भाई बनकर राखी बंधवाई थी। ऐलान किया था कि आजीवन 1 हजार रुपए पेंशन दी जाएगी। कार्यक्रम खुद विश्वास सारंग बतौर विधायक मौजूद थे, लेकिन मंत्री जी ने इसे नकारते हुए कहा कि ऐसा कोई वादा नहीं किया गया था। जानकारी गलत है, जबकि  वो तस्वीर और प्रशासकीय प्रतिवेदन उपलब्ध है, जिसमें गैस पीड़ित विधवा महिलाओं को आजीवन 1000 रुपए पेंशन देने की बात कही गई थी। मध्य प्रदेश की सरकारी वेबसाइट पर भी ये जानकारी उपलब्ध है।

इसे पूर्व में न कमलनाथ सरकार चालू करा पाई और न ही अब शिवराज सिंह चौहान की सरकार चालू करवा पा रही है, जबकि महिलाएं सभी स्तर पर आवेदन दे चुकी हैं।

मौजूद प्रतिवेदन, जिसमें आजीवन पेंशन देने की बात लिखी गई है।

गैस राहत के साथ राशन कार्ड भी बंद किए

कुछ गैस पीड़ित विधवा महिलाओं के राशन कार्ड बंद कर दिए हैं। इस वजह से इन महिलाओं को राशन भी नहीं मिल रहा। बताया जा रहा है कि समग्र आईडी निष्क्रिय कर दी गई है। इस वजह से पाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनों में आईडी नहीं खुल रही है। इन्हें राशन से वंचित रखा जा रहा है। साथ ही, जिन विधवा महिलाओं को प्रतिमाह 5 किलो राशन मिलता है, इसमें 4 किलो गेहूं व 1 किलो चावल होता है। उनका कहना है कि जीवन यापन के लिए ये राशन पर्याप्त नहीं है।

विधवा गैस पीड़ित महिलाओं के लिए संघर्ष कर रहे बालकृष्ण नामदेव।

इन महिलाओं के साथ अन्याय क्यों?

भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशन भोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने बताया कि गैस त्रासदी पीड़ित महिलाएं 5 हजार से अधिक महिलाएं विधवा हुईं हैं। इनकी विधवा पेंशन दिसंबर 2019 से बंद है। इसी दशहरा मैदान में 28 अगस्त 2010 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन विधवा महिलाओं से राखी बंधवाते वक्त ये वादा किया था कि आपको आजीवन पेंशन मिलेगी। आखिर ऐसा अन्याय क्यों?

पेंशन बंद होने के बाद हम सीएम हाउस गए, वहां प्रदर्शन किया, कलेक्टर को लिखकर दिया। सीएम के नाम से उन्हें ज्ञापन दिया। कोरोना में इन महिलाओं को परेशानी हुई, तो जब सरकार सबको राहत दे रही है, तो इन्हें क्यों नहीं? मेरे पास वह सीएम शिवराज सिंह चौहान का प्रशासकीय प्रतिवेदन अब भी मौजूद है, जिसमें आजीवन पेंशन देने का वादा किया गया था।

90 वर्षीय कलावती बाई।

विधवाएं बोलीं - मुश्किल हो गई जिंदगी

85 वर्षीय चिरौंजी बाई कहती हैं, कोरोना काल के दौरान और लॉकडाउन में भूखे रहकर एक टाइम में चटनी से रोटी खाई। किसी ने मदद नहीं की, पेंशन सहारा थी।
70 वर्षीय लाली उर्फ कालीबाई कहती हैं कि पहले 750 रुपए मिलती थी, इसके बाद 1 हजार रुपए मिलने लगी। कोरोना काल में कोई रोटी दे जाता था, कोई सब्जी दे दे तो पेट भर पाए। मांगकर खाना पड़ा।
90 साल की कलावती बाई ने बताया कि किसी के घर काम कर लिया, कहीं चक्की पीस दी तो किसी ने रहम करके रोटी-सब्जी दे दी। भूखे रहकर गुजारा करना पड़ा।

70 वर्षीय लाली उर्फ कालीबाई।

गैस त्रासदी की विधवाओं को वर्ष 2011 से मिल रही थी पेंशन

भोपाल में 4650 गैस पीड़ित विधवा महिलाएं हैं।

350 विधवा महिलाओं की मौत हो चुकी है।
सभी महिलाएं की उम्र 70 साल से अधिक ही है।
1000 रुपए प्रति माह गैस पीड़ित विधवा पेंशन मिलती थी।
2011 से मिल रही है प्रत्येक विधवा गैस पीड़ित को पेंशन।
2016 मई में पेंशन अचानक बंद कर दी थी, जिसे दिसंबर 2017 में चालू किया गया।
2019 में दिसंबर से पेंशन बंद है।
750 रुपए पेंशन हर महीने मिलती थी 2011 के पहले तक।