बिहार की राजनीति में नया मोड़, ‘मुखिया दीदी’ ने छोड़ा RJD का साथ
पटना: बिहार की राजनीति में मंगलवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की कद्दावर नेता और ‘मुखिया दीदी’ के नाम से मशहूर रितु जायसवाल ने बीजेपी (BJP) का दामन थाम लिया है। पटना में बीजेपी दफ्तर में हुए एक कार्यक्रम के दौरान पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल की मौजूदगी में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली।
क्यों छोड़ा रितु जायसवाल ने राजद का साथ?
रितु जायसवाल पिछले कुछ समय से राजद नेतृत्व से नाराज चल रही थीं। उनकी यह नाराजगी तब खुलकर सामने आई जब 2025 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें परिहार सीट से टिकट नहीं दिया। टिकट न मिलने से नाराज होकर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा। हालांकि वह चुनाव हार गईं, लेकिन उन्हें करीब 64 हजार वोट मिले, जिसने साबित कर दिया कि जनता के बीच उनकी पकड़ कितनी मजबूत है। इस बगावत के बाद राजद ने उन पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया था।
पंचायत से शुरू हुआ 'मुखिया दीदी' का सफर
रितु जायसवाल ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत सीतामढ़ी जिले की सिंहवाहिनी पंचायत से की थी। साल 2016 में वह यहां की मुखिया चुनी गईं। पंचायत में उनके बेहतरीन कामों की वजह से उन्हें कई बड़े अवार्ड मिले:
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2017: 'आदर्श युवा सरपंच सम्मान' मिला।
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2018: तत्कालीन उपराष्ट्रपति के हाथों 'चैंपियंस ऑफ चेंज' पुरस्कार मिला।
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2019: उनकी पंचायत को 'दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण सम्मान' दिया गया।
राजद में तेजी से बढ़ा था कद
रितु जायसवाल की लोकप्रियता को देखते हुए राजद ने उन्हें 2020 के विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से टिकट दिया था। बाद में उन्हें पार्टी का प्रदेश प्रवक्ता और फिर महिला विंग का प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया गया। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में राजद ने उन्हें शिवहर सीट से मैदान में उतारा, जहां हारने के बावजूद उन्होंने 4.74 लाख से ज्यादा वोट हासिल किए थे।
भाजपा को रितु जायसवाल से क्या होगा फायदा?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रितु जायसवाल के आने से भाजपा को बड़ा फायदा हो सकता है। महिलाओं के बीच उनकी अच्छी पैठ, जमीन (पंचायत) स्तर पर मजबूत पकड़ और मिथिलांचल इलाके में उनकी सक्रियता को देखते हुए बीजेपी उन्हें अपने लिए एक बड़ा चेहरा मान रही है।

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