संसद परिसर में कांग्रेस का विरोध, सरकार के खिलाफ बुलंद किए आवाज
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान नीट परीक्षा में हुई अनियमितताओं और प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों पर पुलिस कार्रवाई का मामला गरमाया हुआ है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि लाठीचार्ज और बिना नेम टैग वाले लोगों द्वारा हमले के बाद विपक्ष का मूकदर्शक बने रहना संभव नहीं था। उन्होंने सरकार के इस आरोप को खारिज किया कि विपक्ष छात्रों की भावनाओं का फायदा उठा रहा है।
दिल्ली पुलिस का दावा: प्रदर्शन के दौरान हिंसा में 118 पुलिसकर्मी ज़ख्मी
उधर, दिल्ली पुलिस ने मार्च के दौरान हुई घटनाओं पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर हिंसक रुख अपनाया, पत्थरों से हमला किया और सार्वजनिक संपत्तियों को भारी नुकसान पहुँचाया। इस दौरान 15 से 20 सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की गई। पुलिस के मुताबिक, इस हिंसा में वरिष्ठ अधिकारियों सहित कुल 118 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिससे कानून-व्यवस्था और सुरक्षा पर गंभीर संकट पैदा हो गया था।
राहुल-प्रियंका की कस्टडी के विरोध में देशभर में कांग्रेस का हल्लाबोल
दिल्ली में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य वरिष्ठ नेताओं को पुलिस हिरासत में लिए जाने के विरोध में मंगलवार को कांग्रेस का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। तिरुवनंतपुरम, गुवाहाटी, जबलपुर और भुवनेश्वर समेत देश के प्रमुख शहरों में कांग्रेस और उसके छात्र संगठनों ने व्यापक प्रदर्शन किए। कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाने का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की।
लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव: छात्र बर्बरता पर तुरंत चर्चा की मांग
संसदीय कार्यवाही के बीच कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने बुधवार को लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों पर दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल पर तुरंत चर्चा की मांग की। अपने नोटिस में उन्होंने उल्लेख किया कि यह कार्रवाई संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मौलिक अधिकारों का हनन है तथा संसद इस तरह के दमनकारी रवैये पर मूकदर्शक बनकर नहीं बैठ सकती।

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