बड़े प्रोजेक्ट के खर्च का अनुमान गलत साबित हुआ
भोपाल। प्रदेश में लोक निर्माण विभाग की योजनाओं-परियोजनाओं के लिए कंसलटेंट और इंजीनियरों द्वारा जो ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाई जा रही है उसमें खामियां ही खामियां सामने आ रही हैं। ऐसा ही एक और मामला प्रकाश में आया है। एक और बड़े प्रोजेक्ट के खर्च का अनुमान गलत साबित हुआ है। राजधानी के अयोध्या बायपास प्रोजेक्ट की लागत का जो अनुमान लगाया गया है उससे 20 फीसदी कम में उसका निर्माण होगा।गौरतलब है कि लोक निर्माण विभाग अपनी परियोजनाओं के लिए निजी कंसलटेंट कंपनियों से डिटेल प्राजेक्ट रिपोर्ट बनवाता है। जानकारी के अनुसार कई परियोजनाओं की डिटेल प्राजेक्ट रिपोर्ट में कई खामियां सामने आ चुकी हैं।
836 करोड़ में होगा काम
राजधानी के एक और बड़े प्रोजेक्ट पर खर्च का अनुमान गलत साबित हुआ है। अधिकारियों ने जिस अयोध्या बायपास प्रोजेक्ट की लागत दस अरब रुपए से अधिक तय की थी, वो काम अब महज 836 करोड़ रुपए में हो रहा है। यह अनुमानित लागत से 20 फीसदी कम है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कंसलटेंट ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में और इंजीनियरों ने किस आधार पर योजना पर इतना अधिक खर्च होने का एस्टीमेट बना लिया। पीडब्ल्यूडी के ब्रिज सेक्शन ने मुबारकपुर चौराहा से मिसरोद तक रोड नेटवर्र्क और कनेक्टिविटी सुधारने का कॉन्सेप्ट प्लान बनाया था। मकसद यह था कि कहीं भी ट्रैफिक को रूकना न पड़े। रानी कमलापति और मुख्य रेलवे स्टेशन तक पीक अवर्स में भी दस मिनट में पहुंचा जा सके। पीडब्ल्यूडी ने प्रोजेक्ट पर तीन हजार करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया था। इसमें 20 फ्लायओवर, आठ ब्रिज समेत अन्य निर्माण की जरूरत बताई गई थी। इसे तत्कालीन विधायक कृष्णा गौर को दिखाया था। फिर दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को इसका छोटा सा प्रेजेंटेशन दिया था। मंत्री ने इस प्रोजेक्ट पर आगे बढऩे की सैद्धांतिक सहमति दे दी थी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों को मप्र पीडब्ल्यूडी के सहयोग से विस्तृत कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए थे।
अलग-अलग एजेंसी करेंगी काम
कॉन्सेप्ट प्लान पर विचार विमर्श के बाद अधिकारियों ने तय किया कि प्रोजेक्ट को दो हिस्सों में किया जाएगा। यह कार्य अलग-अलग एजेंसियां करेंगी। ऐसे में अयोध्या बायपास दस लेन प्रोजेक्ट का जिम्मा एनएचएआई को दिया गया है। केंद्र सरकार के इंडस्ट्रियल कॉरीडोर के तहत प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इसकी प्लानिंग की है। इसके केवल सिविल वर्क पर 1048 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया था। इससे भी कम लागत में एजेंसी पूरा प्रोजेक्ट करने के लिए फाइनल की जा चुकी है। रवि इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड को प्रोजेक्ट का जिम्मा सौंपा गया है। कंपनी 836 करोड़ में यह कार्य करेगी। काम जल्द रफ्तार पकड़ेगा। यहां ध्यान देने लायक बात यह है कि राज्य सरकार ने प्रोजेक्ट के लिए 1219 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। वही मिसरोद-रत्नागिरी तिराहा कॉरीडोर का कार्य एनएच डिवीजन को दिया गया है। इसकी डीपीआर बनने के बाद ही लागत का अनुमान लगाया जा सकेगा।
20 लाख आबादी को सीधा फायदा
इस प्रोजेक्ट में रत्नागिरी से आसाराम तिराहा तक 16 किमी लंबे मौजूदा फोर लेन बायपास को 10 लेन किया जाएगा। करोंद चौराहा, पीपुल्स मॉल और मीनाल रेसीडेंसी के पास पलाय ओवर बनेंगे। टे्रफिक के दबाव को कम करने के लिए 18 अंडरपास का निर्माण किया जाएगा। अयोध्या बायपास दस लेन से 20 लाख आबादी को सीधा फायदा होगा। भोपाल-रायसेन एनएच 23 और भोपाल विदिशा मार्ग नेशनल हाइवे से जुड़ जाएगा। रत्नागिरी चौराहा से एयरपोर्ट जाने में अभी 50 मिनट लगते हैं। अयोध्या बायपास के दस लेन होने पर यह दूरी करीब 25 मिनट में तय की जा सकेगी। प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनएचएआई भोपाल देवांश बुवाल का कहना है कि रवि इफाबिल्ड 836 करोड़ रुपए में यह प्रोजेक्ट कर रही है। हमने जितने खर्च का अनुमान लाया था, उसके मुकाबले कम लागत में कंपनी के काम के लिए तैयार होने की वजह प्रतिस्पर्धा है। हाइब्रिड एन्यूटी मोड पर यह प्रोजेक्ट किया जाएगा।

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