SDM ऑफिस के बाहर किसानों का जमावड़ा, कई मांगों को लेकर हंगामा
भोपाल। राजधानी के एमपी नगर और हुजूर तहसील के सैकड़ों किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ एसडीएम कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन मोर्चा खोल दिया है। भारतीय किसान संघ के बैनर तले एकत्र हुए इन किसानों का आरोप है कि राजस्व विभाग और तहसील स्तर पर उनके कार्यों को जानबूझकर लटकाया जा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। किसान कुबैर सिंह राजपूत ने स्पष्ट किया कि जब तक स्लॉट बुकिंग, नामांतरण और भूमि अधिग्रहण जैसे गंभीर मुद्दों का ठोस निराकरण नहीं होता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।
गेहूं उपार्जन में अव्यवस्था और मुआवजे की मांग पर अड़े किसान
किसानों की सबसे प्रमुख नाराजगी गेहूं खरीदी के लिए पोर्टल पर स्लॉट बुकिंग न होने और खरीदी में हो रही देरी को लेकर है। किसानों का कहना है कि अव्यवस्था के कारण उनका अनाज खुले में पड़ा है, जिससे खराब मौसम में फसल बर्बाद होने का खतरा बढ़ गया है। इसके साथ ही, पिपलानी से खजूरीकलां बायपास तक बनने वाली 4-लेन सड़क परियोजना में अधिगृहित की गई जमीन के बदले किसान सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप मुआवजे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि उन्हें बाजार मूल्य से चार गुना मुआवजा और जमीन की भविष्य की कीमत को ध्यान में रखते हुए भुगतान किया जाना चाहिए।
राजस्व प्रकरणों में लेटलतीफी और पटवारियों की अनुपलब्धता
धरना दे रहे किसानों ने तहसील कार्यालयों में व्याप्त 'बाबूवाद' और दलालों के हस्तक्षेप पर कड़ा ऐतराज जताया है। उनकी मांग है कि सीमांकन, नामांतरण और बंटान जैसे राजस्व मामलों का निराकरण एक निश्चित समय सीमा के भीतर किया जाए। इसके समाधान के लिए किसानों ने प्रस्ताव रखा है कि सभी पटवारियों को अनिवार्य रूप से प्रत्येक सोमवार और गुरुवार को अपने संबंधित हल्के के गांवों में मौजूद रहना चाहिए। इससे ग्रामीणों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए बार-बार तहसील या जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और दलाली प्रथा पर भी अंकुश लगेगा।
फसल बीमा और बुनियादी सुविधाओं के संधारण की चेतावनी
क्षेत्र में हुई हालिया ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से हुए नुकसान पर भी किसानों ने अपनी चिंता व्यक्त की है। उनकी मांग है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पारदर्शी तरीके से तत्काल सर्वे कराया जाए ताकि पीड़ित किसानों को आर्थिक राहत मिल सके। साथ ही, बिजली कंपनी की लापरवाही को उजागर करते हुए किसानों ने चेतावनी दी है कि बारिश का मौसम शुरू होने से पहले जर्जर तारों और झुके हुए पोल का संधारण कार्य पूरा किया जाए। किसानों के अनुसार, बार-बार आवेदन देने के बावजूद प्रशासन की चुप्पी ने उन्हें इस अनिश्चितकालीन प्रदर्शन के लिए मजबूर किया है।

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