PM मोदी ने देशवासियों से कहा- पेट्रोल-डीजल सोच-समझकर खर्च करें
वडोदरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के वडोदरा में जनता को संबोधित करते हुए देश की आर्थिक मजबूती और वैश्विक संकटों से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने बदलते वैश्विक हालातों को देखते हुए देशवासियों से विशेष सहयोग की अपील की है।
दुनिया के हालात और भारत की जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में चल रहे युद्ध को इस दशक की सबसे बड़ी चुनौती बताया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह पूरी दुनिया ने एकजुट होकर कोरोना महामारी का सामना किया था, उसी तरह अब इस युद्ध के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट से भी निपटने की जरूरत है। पीएम मोदी के अनुसार, युद्ध की वजह से सामान की आवाजाही (सप्लाई चेन) पूरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे भारत पर दोहरा संकट मंडरा रहा है। उन्होंने नागरिकों को याद दिलाया कि जब भी देश पर मुसीबत आई है, भारतीय नागरिकों ने हमेशा अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई है और इस बार भी जन-भागीदारी की सख्त जरूरत है।
पेट्रोल-डीजल की बचत और संसाधनों का सही उपयोग
देश के बढ़ते आयात खर्च को कम करने के लिए प्रधानमंत्री ने लोगों से ईंधन के इस्तेमाल में कटौती करने का आग्रह किया है। उन्होंने सलाह दी कि लोग अपनी निजी गाड़ियों के बजाय मेट्रो, इलेक्ट्रिक बसों और सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें। जो लोग कार का इस्तेमाल करते हैं, वे 'कार पूलिंग' यानी एक ही गाड़ी में कई लोगों के साथ सफर करने की आदत डालें ताकि सड़कों पर गाड़ियों की संख्या और पेट्रोल की खपत कम हो सके। इसके साथ ही उन्होंने दफ्तरों और स्कूलों को सलाह दी कि वे डिजिटल तकनीक का लाभ उठाएं और जितना संभव हो सके, वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन पढ़ाई को प्राथमिकता दें ताकि अनावश्यक भागदौड़ से बचा जा सके।
सोना खरीदने से बचने और स्वदेशी अपनाने की सलाह
आर्थिक बचत को लेकर प्रधानमंत्री ने एक बहुत ही अनोखी अपील करते हुए कहा कि फिलहाल कुछ समय के लिए सोने (गोल्ड) की खरीदारी को टाल देना चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत को विदेशों से सोना मंगवाने के लिए बहुत बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। अगर नागरिक कुछ समय तक सोना न खरीदें, तो देश की अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी। इसी तरह उन्होंने खाने के तेल की खपत कम करने की बात कही, जिससे सेहत और देश का पैसा दोनों बचेगा। पीएम मोदी ने 'लोकल फॉर वोकल' अभियान को एक जन आंदोलन बनाने पर जोर दिया और कहा कि हमें विदेशी सामान के बजाय अपने गांव और शहर में बने उत्पादों को खरीदना चाहिए ताकि स्थानीय उद्यमियों को ताकत मिले।

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