खनन माफियाओं पर ग्रामीणों का गुस्सा, कार्रवाई नहीं होने का आरोप
सीधी: मध्य प्रदेश के सीधी जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला प्रकाश में आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली और खनिज विभाग की मुस्तैदी पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। यह पूरा मामला सिहावल जनपद के अंतर्गत आने वाले ग्राम कुंजुन कला का है, जहाँ शासकीय दस्तावेजों में करीब एक दशक पहले ही बंद की जा चुकी 'स्टोन माइंस' (पत्थर खदान) आज भी धड़ल्ले से संचालित की जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि रसूखदारों द्वारा क्षेत्र के गरीब आदिवासियों और किसानों की जमीनों पर बलपूर्वक अवैध कब्जा जमाकर ब्लैक स्टोन का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। यही नहीं, खदान में होने वाले भीषण विस्फोटों (ब्लास्टिंग) के कारण ग्रामीणों के पक्के मकानों में दरारें आ रही हैं, जिससे लोगों की जिंदगी चौबीसों घंटे खतरे में बनी हुई है।
बिना कागजात और बिना NOC के चल रहीं पोकलेन मशीनें
ग्रामीणों का साफ कहना है कि जिस खदान को प्रशासन बरसों पहले बंद और प्रतिबंधित घोषित कर चुका था, वहाँ आज भी भारी-भरकम मशीनों की मदद से दिन-रात पत्थर निकाला जा रहा है। आरोप है कि खदान संचालक गौरव सिंह के पास न तो कोई वैध दस्तावेज हैं और न ही ग्राम पंचायत की ओर से कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी किया गया है। खुद ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों ने ऑन-कैमरा यह बात स्वीकार की है कि पंचायत स्तर पर इस खदान को चलाने की कोई मंजूरी नहीं दी गई है।
भयावह विस्फोटों से टूट रहे मकान, दहशत में ग्रामीण
इलाके के निवासियों ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि खदान में हर दिन नियम-कायदों को ताक पर रखकर हैवी ब्लास्टिंग की जाती है। इन धमाकों की तीव्रता इतनी ज्यादा होती है कि बड़े-बड़े पत्थर छिटककर सीधे गांव के रिहायशी इलाकों और घरों तक पहुंच जाते हैं। इस कंपन के कारण कई घरों की दीवारें चटक गई हैं, यहाँ तक कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने नए मकान भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। गांव के लोग और उनके मवेशी हमेशा किसी अनहोनी के साए में जीने को मजबूर हैं।
गहरे गड्ढों से घटा जलस्तर, बढ़ा मौतों का सिलसिला
अवैध खनन के कारण पर्यावरण और इंसानी जिंदगियों को भारी नुकसान पहुंच रहा है:
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खतरनाक मौत के कुएं: खदान से पत्थर निकालने के बाद ऑपरेटरों ने विशाल और गहरे गड्ढों को बिना किसी बाउंड्री या सुरक्षा इंतजामों के खुला छोड़ दिया है।
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लापरवाही ने ली जान: करीब पांच महीने पहले इन्हीं असुरक्षित गड्ढों में विश्वकर्मा परिवार के एक नौजवान की लाश मिली थी। इसके अलावा, दर्जनों मवेशी भी प्यास बुझाने के चक्कर में इन गड्ढों में गिरकर दम तोड़ चुके हैं।
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तपती गर्मी में जलसंकट: निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक गहराई तक खुदाई किए जाने के कारण पूरे डाभिया और कुंजुन कला क्षेत्र का भू-जल स्तर (वाटर लेवल) पाताल में चला गया है। गांव के हैंडपंप और कुएं पूरी तरह सूख चुके हैं, जिसके चलते ग्रामीण इस भीषण नौतपा और तपती धूप में पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं।
"पुलिस-प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल"
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर मोड़ आदिवासी समाज की जमीन को लेकर आया है। कानूनन आदिवासियों की भूमि की न तो सीधे बिक्री हो सकती है और न ही उसकी रजिस्ट्री कराई जा सकती है, ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि किस सरकारी सह पर वहां माइनिंग की जा रही है। ग्रामीणों का खुला आरोप है कि शिकायत के बावजूद खनिज विभाग, राजस्व अमला, वन विभाग और स्थानीय पुलिस आंखें मूंदे बैठे हैं।
अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद जिला प्रशासन इस सिंडिकेट पर कोई कड़ा एक्शन लेता है या फिर रसूखदारों को यूं ही खुली छूट मिलती रहेगी। ग्रामीणों ने कलेक्टर से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को जेल भेजने की मांग की है।

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